Sunday, January 2, 2022
Love Poetry
मेरी बुआ पंक्ति
मेरी ताकत हो तुम, मेरी शुभचिंतक हो तुम, मेरे जीने की वजह हो तुम, आज जो भी हो सब आपका दिया हुआ भेंट है, तुमको मैं क्या दो, जो भी है सब तुम्हारा है, मेरी बुआ तुम्हारा साथ मुझे अपने हर जनम में चाहिए, मुझे दुनिया नही मुझे सिर्फ आपका प्यार चाहिए। ❤️
By:- Kshma Rastogi🌺
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Saturday, November 6, 2021
Saturday, October 16, 2021
Wednesday, October 13, 2021
Quotes by Kshma Rastogi
जब दोनो का प्रेम सत्य है तो डर कैसा,
प्रेम हैं तोह बिछड़ने का डर क्यों,
जब डर है तो प्रेम कैसा,
प्रेम तो वो परिभाषा है जिसमे न खोने का डर , ना पाने की चाह ,
जो बिन शब्दो को बोले समझ जाए मन की बात,
उससे क्या छुपाना, जो छुपाना पड़े वो विश्वास कहां,
जो गलती होने पर गलती याद रखे वो कैसा साथी,
अच्छाई छोड़ कमी जो देखे, वो साथ कैसे निभाएगा,
जब मन न मिलता एक दूसरे से, फिर उस रिश्ते में क्यों रहना ।
By :- Kshma Rastogi
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Quotes by Kshma Rastogi
ना जाने कितनी बातें तेरे साथ कर बैठे हम,
हम बात कर बैठे तुमसे अब उन बातों का भूलना है मुश्किल,
हमारा तुम्हारा मिलना यूं न होना लिखा था,
हम किस्मत और नसीब से लड़ते रह गए, और तेरा मेरा बिछड़ना शुरू होगया,
ना जाने कितनी उम्र गुजारी हो तेरे बिना,
कोई तो फरियाद रही होगी तेरे दिल मे भी,
हर फरियाद मेरी रही हों, यह तो जरूरी नहीं,
मेरा ही साया रही हो जरूरी नहीं, कुछ तो तेरा साया भी मेरे साथ रहा,
बताना मुश्किल है, हम तुझे क्या समझ बैठे ।
By :- Kshma Rastogi
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Diwali special Quotes by Kshma Rastogi
Monday, October 11, 2021
Saturday, September 18, 2021
Kshma Poetry
यह दुनिया ऊपरी हंसी देखती है , आंखों में छिपे आंसु नही ,
यह दुनिया कड़वे बोल सुनती है , उसके पीछे मीठी बोली नही सुनती ,
कहने को हजार लोग अपने लगते हैं , जब पीछे मुड़ के देखते हैं सिर्फ अपनी परछाई ही दिखाई देती है ,
सुख में सभी आना चाहते है , दुख में सब चले जाते हैं ,
यह दुनिया एक दर्पण की तरह है, जिसमे देखो तो अपनी प्रतिछाया, ना देखो तो कोई प्रतिछाया नही ।
By :- Kshma Rastogi
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| Kshma Poetry |
ना हीर थी , ना कोई रांझा था ,
एक अनकही, एक अनदेखी, एक अनसुनी जोड़ी थी,
जो मिलने से पहले ही ना जाने क्यों बिछड़ गई,
थे दोनो प्रेम पुजारी, लेकिन नसीब को दोनो का मिलना न जाने क्यों अच्छा ना लगा,
बिछड़े दोनो जबसे गुमसुम हो बैठे, लोगों को उनका दुख समझ न आया और वो बताए भी नही ।
By:- Kshma Rastogi
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Sunday, September 12, 2021
Quotes
दिन के उजाले में नजर नही आते अपने, दिन में तो अपनी परछाई दिखाई देती हैं, रात में वो परछाई भी साथ छोड़ देती है, किस पर करे यकीन यह कहना मुश्किल है, हम करे खुद पर यकीन इतना यकीन होना चाहिए।
Friday, September 10, 2021
Love Poetry
कैसे भूलेंगे उसको वो दिमाग में नहीं दिल में बसता है ,
उसकी हर बात में मेरा जिक्र है , मेरी हर सांस में उसका नाम है ,
वो मनमौजी सा लड़का है , मैं चंचल सी लड़की ,
हम दोनों मिले हैं उस राह पर जहां चाहा कर भी बिछड़ना मुश्किल है ,
राहें अलग जरूर है लेकिन राह अंत में मिल ही जाती है ।
By :- Kshma Rastogi
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Love Poetry
हम समझ न पाए क्या कमी थी हमारे प्यार में,
जो यू रिश्ता हमारा खत्म हो गया,
हम वफादार रहे तुम्हारे, तुम भी हो जाते थोड़ा वफादार,
हम मानते हर बात तुम्हारी, तुम भी बात मान जाते यूं दूर होने से सवालों के जवाब मिला नही करते ।
By :- Kshma Rastogi
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Love Poetry
निकल आए उनकी गालियों से , लेकिन आज भी भटक रहे हैं उनकी यादों की गालियों में ,
दिल को समझाए है बहुत , दिल मानता नहीं अब नही साथ ,
उनकी यादों से बाहर निकलने की बहुत किए है कोशिश , लेकिन यह कोशिश कामयाब नही होती ,
मुस्कराते बहुत है लेकिन हर मुस्कुरात मुस्कान नही होती ,
होते है करीब बहुत लोग , यह दिल अकेला ही पाता है खुद को ,
ना होठों पर शिकवे ना दिल में कोई गिले ,
फिर भी दिल यूं यादों की गालियों में भटकता रहता हैं ।
By :- Kshma Rastogi
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Saturday, September 4, 2021
Thursday, September 2, 2021
Sad Poetry by Kshma Rastogi
Sunday, August 29, 2021
Love Poetry
Friday, August 27, 2021
Love Poetry
मिले थे जब हम पहली बार , तुम सबसे पहले करीब आए थे ,
तुम्हें मैं अच्छी लगती थी या नहीं , यह सिर्फ तुम ही जानते थे ,
सबसे पहले करीब तुम ही आए थे ,
तुम्हे मेरे साथ वक्त बिताना अच्छा लगता था या नहीं यह तुम ही जानते थे ,
मुझे तुम्हारे साथ वक्त बिताना पसंद था , इसलिए तुम्हे बुलाती थी ,
तुम मेरे लिए बाइक से कोसों दूर से आते थे , फिर साथ बैठा कर घुमाया भी करते थे ,
हम दोनो को साथ बाइक पर बैठ कर घूमना पसंद था ,
छोटी छोटी बातों में लड़ाइयां हुआ करती थीं , तुम बड़ी आसानी से मना लिया करते थे ,
लड़ाइयों में तुम्हारे दोस्तो का बोलना और हमारी लड़ाई शांत करवाना ,
फिर साथ मिलकर यूं रेस्तरां में एक प्लेट में खाना ,
थोड़ी हिजक तुम्हे थी , थोड़ी हिजक मुझे थी ,
शर्म से एक दूसरो से जो बात करनी हुआ करती थीं , ना हो पाती थी ,
तुम मेरे बोलने का इंतजार करते , मैं तुम्हारे बात शुरू करने का इंतजार ,
यूं हमारी बात ना हों पाती थी , घर पहुंच कर मैसेज करते , बात क्यूं नही करते ,
तुम रूठ जाते , थोड़ा मैं रूठ जाती ,
यूं बातो ही बातो मे तुम्हारा मुझे वादा करना , कभी साथ न छोड़ने का ,
तुम्हारी बातो को सच मान , उन वादों पर यकीन करना ,
था कुछ ऐसा जो जोड़े रखता मुझे तुमसे ,
जितनी भी हो लड़ाई , रहना सिर्फ तुमसे जुड़े रहना ,
है बदल सा गया अब कुछ , यूं अब पहली जैसी बात ना रही ,
पहली हुआ करती घंटो बातें , अब नही हुआ करती बातें ,
नही रही पहली जैसी कोई बात , ना रहे पहले जैसे जज़्बात ,
अब ना रहा तुम्हारी किसी बात पर भरोसा ,
तुम कर दिए कुछ ऐसा , यह दिल होगया चूर – चूर ,
तुम मुझे पसंद करते या नही यह सिर्फ तुम जानते ,
मेरे दूर होने से मुझसे बार बार बात करने का प्रयास करते ,
तुम्हारे हिस्से मे अब मेरी चुप्पी , मेरे हिस्से में तुमसे मिला दर्द ,
तुम दूर सही लेकिन अब सुकून है , अब तुम्हारी और मेरी लड़ाई नहीं ,
यह दिल भी समझ चुका है , अब तेरे और मेरे रास्ते है अलग ,
हां शुरूवात तुमसे हुई , और खत्म मैं कर रही ,
जानती हो बहुत गलतियां हुई , माफी मांगती सभी गलती की ,
सबसे पहले करीब तुम आए थे , देखो दूर सबसे पहले मैं जा रही हूं ,
देखो मैं अपने दिल को समझा रही हो , तुमसे मैं दूर जा रही हूं ।
By :- Kshma Rastogi
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Love Poetry
प्यार में मिलना बिछड़ना लगा रहता है, लेकिन उस प्यार को बनाए रखना मुश्किल होता है, प्यार में अक्सर वादे निभाए भी नही जाते है, ओर प्यार में अक...
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नमस्ते दोस्तो , दोस्तो आज मैं क्षमा रस्तौगी आपको बताएगी अपनी खुद की अनुभूति ट्रेन छूट जाने की । दोस्तो जब आप नए शहर में जाते हैं , तब आपके द...
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ये बेवजह प्यार का एहसास , लगे ये बिन मौसम बरसात , बिन मोर मोरनी नाचे , तेरे प्यार के एहसासों में बंधे , मोरनी की तलक देखो मोर को निहारने की...